मंगलवार, 16 अक्टूबर 2012

गुफ्तगू की मासिक गोष्ठी में बही कविताओं की बयार

इलाहाबाद। साहित्यिक पत्रिका ‘गुफ्तगू’ के तत्वावधान में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन इलाहाबाद स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्टृीय हिन्दी विश्वविद्यालय के शाखा में किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि मुनेन्द्र नाथ श्रीवास्तव ने किया। मुख्य अतिथि डाॅ. अमिताभ त्रिपाठी थे, जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर वरिष्ठ शायर सागर होशियापुरी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी ने किया। इस अवसर पर ‘गुफ्तगू कैम्पस काव्य प्रतियोगिता’ के विजेताओं को डीवीडी और फोटो वितरित किया गया।

सबसे पहले अनुराग अनुभव ने तरंन्नुम में कविता पढ़कर महफिल में जोश पैदा कर दिया-
मैं हवा पुरवई,तुम महक सुरमई /आओ मिलकर के कर दें समा जादुई।

युवा कवि पंकज फराज ने कहा-
फूलों की खूश्बू चुराने लगे हैं/मेरे महबूब ख़्वाब में आने लगे हैं।

भानु प्रकाश पाठक की कविता यूं थी- 
धीरे-धीरे कगना उतारा बहुरानी, सेंदुरा क खतम भइल तोहरे कहानी

कुमार विकास ने लय में गीत पढ़ा-
करीब आसमां के और ज़मीं से दूर होना है, जरा मगरूर हूं फिर भी बहुत मगरूर होना है

लवकुश कुमार आनंद की कविता भी सराहनीय रही-
आज हजारो के संग, संग अलख जगाने आया,रूप वतन का फिर वह नया दिखाने आया है।

नितीश कुमार कुशवाहा ने कहा-
हालात हुये हैं कुछ यूं हर वक्त/ खल्वत को खलाओ से लड़ते देखा है।

नित्यानंद राय ने कहा-
तुम भी शांत रहो, मत चिल्लाओ, तुम्हारे खेतों में भी उगेंगे माल, मत घबराओ।

 

रमेश नाचीज़ की ग़ज़ल काफी सराही गई-
दर्द हम अपने दिल का सुनाने लगे/लोग महफिल से उठ-उठ के जाने लगे।
क्या नसीहत मैं नाचीज़ देता उन्हें/ऐब मेरे ही जब तो गिनाने लगे।

पीयूष मिश्र ने कहा-
मैंने ये कैसी सजा पाई है, घर की मेरे रोशनी चुराई है।
दूर हो जाता है वो चुभ-चुभकर, और कहता है मेरा भाई है।

कवयित्री गीतिका श्रीवास्तव ने तरंन्नुम ने गीत पेश किया-
दुनिया के बेडि़यों को तोड़ते जाना/खुद से जो वादा है उसको निभाना।
पग-पग काटे हैं ये ना बिसराना/इन कांटों के ही आगे खुशी का खजाना।

विमल कुमार ने कहा-
नहीं सिर्फ़ पत्थरों में, नहीं बस किताबों में,कण-कण में व्याप्त सर्वत्र चेतना हूं मैं।

 

शुभ्रांशु पांडेय ने व्यंग्य लेख पढ़ा-
आप लोग हिन्दी में किसी से कहते हैं न बैठ जाओ, सो जाओ, और तो और आ जाओ, अब ये बताइये कि अगर कोई बैठ गया तो मतलब ये हुआ कि उसकी क्रिया की गति समाप्त हो गयी है, फिर अगर उसे चलना कहा जाये तो वो क्या चलेगा।

मंजूर बाकराबादी ने व्यंग्य कविता पढ़ा-
रिश्वत चाहे जितनी ले लो, बाबू हमको नौकरी दे दो
चाय के बदले पव्वा पी लो, बाबू हमको नौकरी दे दो।

विपिन श्रीवास्तव ने कहा- 
आइये मत शरमाइये बैठिये हुजूर नवाजि़श आपकी

शैलेंद्र जय ने कहा-
जीने की कला मैंने फूलों से उधार ली है, यूं ही नहीं जि़न्दगी कांटों में गुजार ली है।

अजय कुमार ने कहा-
मर्यादा के भाव न जाने बनते रघुनंदन, कट्टा पिस्टल हाथों में हैं माथे पर चंदन।
वीनस केसरी की कविता लोगों ने पसंद किया-
खूबसूरत दृश्य हम गढ़ते रहे, शब्द चित्रों की सफलता के लिए
शह्र धीरे-धीरे, बन बैठा महीन, दिख रहा हर कोई, कितना जहीन।गांव दंडित है सहजता के लिए।


 
तलब जौनपुरी ने कहा-
मेरी वो सरबुलन्दी है कोई छू भी नहीं सकता,
मुकाबिल अपनी हस्ती के केाई हस्ती नहीं लगता

अखिलेश द्विवेदी की कविता यूं थी-
इस जग में सब कुछ सुंदर है, तुम सुंदरता की किताब हो।
कितना मैं चाहूं तुझको, तुम मेरी चाहत का खिताब हो।

इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी की ग़ज़ल भी सराही गई-
जख़्म देगा न बद्दुआ देगा, ग़म मेरा तुझको आसरा देगा,
शाम को तेरा छत पे आ जाना, शह्र में हादसा करा देगा।

सुषमा सिंह की ग़ज़ल सराहनीय रही-
कितने जज़्बात हमारे दिल में, धूप-बरसात हमारे दिल में।
बाहरी क़ैद न हथकडि़यां हैं, हैं हवालात हमारे दिल में।

सौरभ पांडेय ने कहा-
रुइया बादल कोना-कोना,परती धरती दौड़े छौना।
आस दुपहरी सोख गयी रे, हरिया तन की क्यारी-क्यारी।आओ गटकें पान-सुपारी।



नायाब बलियावी की ग़ज़ल ने महफिल में जोश पैदा कर दी-
दिल लगा लीजिए कुछ देर को हंस ली जै मगर,
मुस्तकि़ल इसके लिए आप को रोना होगा।

सागर होशियारपुरी ने कहा-
हमने किसी के इश्क़ में खुद को मिटा दिया,
मेयार आशिक़ी का यूं उंचा उठा दिया।
है पूजना तो पूजिए एक-इक किसान को,
मेहनत से जिसने मिट्टी को सोना बना दिया।
मुख्य अतिथि डा. अमिताभ त्रिपाठी ने कहा-
किसी को इतना न चाहो कि बदगुमां हो जाये
न लौ इतना बढ़ाओ के वो धुआं हो जाये।
       अध्यक्षता कर मुनेन्द्र नाथ श्रीवास्तव ने कहा-
मन में जहां दुराव हो हमका न ले चलो
प्यार का अलगाव हो, हमका न ले चलो।
हम भाव के गगन के, उड़ते हुए पंछी,
जलता हुआ अलाव हो, हमको न ले चलो।


इस मौके पर आसिफ गा़ज़ीपुरी, अजय कुमार पांडेय, अशोक कुमार स्नेही, खुर्शीद हसन,अजीत शर्म आकाश, अरविन्द वर्मा आदि मौजूद रहे।

शनिवार, 6 अक्टूबर 2012

सराहनीय है गुफ्तगू का प्रयास-सोम ठाकुर


गुफ्तगू कैम्पस काव्य प्रतियोगिता में गीतिका श्रीवास्तव प्रथम
इलाहाबाद।कैम्पस काव्य प्रतियोगिता की शुरूआत करके ‘टीम गुफ्तगू’ ने एक सराहनीय कार्य किया है, इससे नये लिखने वालों की जबरदस्त हौसलाअफज़ाई होगी। हमें ऐसे प्रयासों का तहेदिल से स्वागत करना चाहिए। इलाहाबाद की सरज़मीन वैसे भी साहित्य के लिए काफी ज़रखेज रही है, गुफ्तगू का यह कदम इसमें एक जबरदस्त बढ़ोत्तरी है। यह बात उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व अध्यक्ष प्रो.सोम ठाकुर ने ‘गुफ्तगू कैम्पस काव्य प्रतियोगिता के अवसर पर कही। गांधी जयंती के अवसर पर प्रीतमनग के मदर इंटरनेशलन पब्लिक स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर एहतराम इस्लाम ने की जबकि मुख्य अतिथि प्रो. सोम ठाकुर थे। संचालन इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी ने किया। इस अवसर पर साहित्यिक पत्रिका गुफ्तगू के ‘अब्बास खान संगदिल’ अंक का विमोचन भी किया गया। मेयर श्रीमती अभिलाषा गुप्ता ने दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का उद्घाटन किया।काव्य प्रतियोगिता के अतंर्गत 20 प्रतिभागियों से काव्य पाठ कराया गया। जजों ने पैनल ने कविताओं के आधार पर प्रतियोगियों को अंक दिया, जिसके बाद विजेताओं का निर्णय हुआ। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान गीतिका श्रीवास्तव   ने द्वितीय स्थान पीयूष मिश्र ने हासिल किया, जबकि तीसरे स्थान पर अनुराग अनुभव रहे। इसके अलावा कु. नीलू मिश्रा, दुर्गेश सिंह, अजय कुमार, प्रवीण वर्मा, सुशील द्विवेदी, रोहित त्रिपाठी रागेश्वर, अमनदीप सिंह,नितीश कुशवाहा, अजय कुमार भारतीय और भानु प्रकाश पाठक को सांत्वना पुरस्कार के रूप में 500-500 रुपये की किताबें दी गईं। आनंद कुमार अािदत्य, दीपक त्रिपाठी,पंकज फराज, नैतिक प्रसाद पांडेय, अवधेश यादव एवं सनी सिंह को सहगाभागिता स्वरूप प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम की रूपरेखा पेश करते हुए शिवपूजन सिंह ने कहा कि हमने पिछले वर्ष इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया था, लोगों का सहयोग मिलता रहा तो आने वाले दिनों यह आयोेजन और बड़ा रूप लेगा। वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र ने कहा कि गुफ्तगू की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, एक छोटे प्रयास से शुरू की गई यह पत्रिका आज देश-विदेश में नाम कर रही है। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ शायर एहतराम इस्लाम ने कहा कि आज गुफ्तगू जैसी पत्रिकाओं का ही चलन है, इसकी ख़ासियत यह है कि इसमें हिन्दी और उर्दू दोनों ही साहित्य की सामग्री पढ़ने को मिलती है। मध्य प्रदेश के खंडवा से आये शायर अब्बास खान संगदिल का कहना था कि इलाहाबाद जैसे नगरी में आकर सम्मान पाना मेरे लिए एक बड़ी उपलब्धि है, इसे मैं कभी भूल नहीं सकता। इस अवसर अपर नगर आयुक्त प्रदीप कुमार, जी डी गौतम, संजय कुमार सिंह,सी आर यादव, डाॅ. जे़बा महमूद, धनंजय सिंह, डाॅ. पीयूष दीखित, डाॅ. राजीव  सिंह, हसनैन मुस्तफ़ाबादी, सौरभ पांडेय, वीनस केसरी, नरेश कुमार महरानी, संजय सागर,डाॅ. सोनिया सिंह, तारिक सईद अज्जू, कृष्ण बहादुर सिंह, राजेश कुमार सिंह, नायाब बलियावी, सौरभ पांडेय आदि लोग मौजूद रहे।

दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन करतीं इलाहाबाद की मेयर श्रीमती अभिलाषा गुप्ता
मेयर श्रीमती अभिलाषा गुप्ता का स्वागत करतीं श्रीमती खुर्शीद जहां
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एहतराम इस्लाम का स्वागत करते वीनस केसरी
एहतराम इस्लाम का स्वागत करते किसलय केसरवानी
उ.प्र. हिन्दी संस्थान के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सोम ठाकुर का स्वागत करते शिवपूजन सिंह
प्रो. सोम ठाकुर का स्वागत करते कृष्ण बहादुर सिंह
अब्बास खान ‘संगदिल’ का स्वागत करते नित्यानंद राय
राजीव राय का स्वागत करते नरेश कुमार ‘महरानी’
वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र का स्वागत करते नरेश कुमार महरानी
मुंडेरा मंडी परिषद के सचिव संजय सिंह का स्वागत करते तारिक सईद अज्जू
इलाहाबाद हाईकोर्ट ke संयुक्त निबंधक हसनैन मुस्तफ़ाबादी का स्वागत करते नायाब बलियावी
श्रीमती इंदु सिंह का स्वागत करतीं कु. नूरजहां
सी.आर. यादव का स्वागत करते आनंद सिंह
डा. ज़ेबा महमूद को प्रतीक चिन्ह भेंट करते प्रो. सोम ठाकुर साथ में खड़े हैं इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी और नरेश कुमार महरानी
विचार व्यक्त करतीं मेयर श्रीमती अभिलाषा गुप्ता
कार्यक्रम का संचालन करते इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी
विचार व्यक्त करते शिवपूजन सिंह
विचार  व्यक्त करते धनंजय सिंह
काव्य पाठ करते प्रवीण वर्मा
काव्य पाठ करती कु. नीलू मिश्रा
काव्य पाठ करती कु. गीतिका श्रीवास्तव
काव्य पाठ करते अनुराग अनुभव
काव्य पाठ करते सौरभ पांडेय
काव्य पाठ करते अब्बास खान संगदिल
विचार व्यक्त करतीं डा. ज़ेबा महमूद
काव्य पाठ करते प्रो. सोम ठाकुर
गुफ्तगू के अब्बास खान संगदिल अंक का विमोचनः बायें से-प्रदीप कुमार,इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी,नरेश कुमार महरानी, हसनैन मुस्तफाबादी,एहतराम इस्लाम, प्रो. सोम ठाकुर, अब्बास खान संगदिल, श्रीमती अभिलाषा गुप्ता,डा. ज़ेबा महमूद, मुनेश्वर मिश्र, जी डी गौतम, राजीव राय,श्रीमती इंदु सिंह, धनंजय सिंह और राजीव सिंह
ग्रूपिंग फोटोः खड़े हुए बायें से- वीनस केसरी, राजीव राय, नरेश कुमार महरानी, धनंजय सिंह, सौरभ पांडेय,डा. ज़ेबा महमूद, अब्बास खान संगदिल, प्रो. सोम ठाकुर, एहतराम इस्लाम, इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी, डा.रेखा सिंह, डा. शालिनी सिंह, डा. सोनिया सिंह और शिवपूजन सिंह। फूलमाला पहनकर बैठे हुए बायें से- अनुराग अनुभव, पीयूष मिश्र और गीतिका श्रीवास्तव
तृतीय पुरस्कार विजेता को पुरस्कार देते हुए अब्बास खान संगदिल, प्रो. सोम ठाकुर, डा. सोनिया सिंह और अन्य
द्वितीय पुरस्कार विजेता पीयूष मिश्र को पुरस्कार देते हुए डा.सोम ठाकुर, एहतराम इस्लाम और अन्य
प्रथम पुरस्कार विजेता गीतिका श्रीवास्तव को पुरस्कार देतीं डा. सोनिया सिंह,। बायें से शिवपूजन सिंह, इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी, राजीव राय, गीतिका श्रीवास्तव, धनंजय सिंह, प्रो.सोम ठाकुर, डा सोनिया सिंह, वीनस केसरी

विचार व्यक्त करतीं डा. जे़बा महमूद, पीछे खड़े हैं गुफ्तगू के संस्थापक इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी
प्रथम पुरस्कार विजेता गीतिका श्रीवास्तव अपनी सहेली के साथ
प्रथम पुरस्कार विजेता गीतिका श्रीवास्तव का बधाई देतीं डा. सोनिया सिंह
कार्यक्रम के दौरान डा. ज़ेबा महमूद से बात करते हुए गुफ्तगू के संस्थापक इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी
काव्य पाठ करते नायाब बलियावी
कु. नीलू मिश्रा का सांत्वना पुरस्कार के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान करते प्रो.सोम ठाकुर, साथ में खड़े हैं एहतराम इस्लाम और सौरभा पांडेय
प्रतिभागियों का काव्य पाठ ध्यानपूर्वक सुनते निर्णायक मंडल के सदस्य सौरभ पांडेय, डा. पीयूष दीक्षित और नायाब बलियावी

धनंजय सिंह को प्रतीक चिन्ह भेंट करते प्रो. सोम ठाकुर साथ में खड़े हैं शिवपूजन सिंह, अब्बास खान संगदिल और नरेश कुमार महरानी