‘गुफ़्तगू’ एक मजबूत दरख़्त बन चुका है: रज़ा मुराद
‘प्रयागराज लिटरेरी फेस्टिवल’ के दूसरे दिन विभूतियों का हुआ सम्मान
| लोगों को संबोधित करते रज़ा मुराद |
प्रयागराज। 24 साल पहले गुफ़्तगू जो एक नन्हा पौधा था, आज वह एक मजबूत दरख़्त बना चुका है। ऐसे दरख़्त का खड़ा हो जाना बहुत बड़ी बात है। अगले साल इसकी सिल्वर जुबली होगी और बहुत ही शान से यह सिल्वर जुबली कार्यक्रम आयोजित करेंगे। यह बात 29 मार्च की शाम साहित्यिक संस्था गुफ़्तगू की तरफ से आर्य कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित ‘प्रयागराज लिटरेरी फेस्टिवल’ के दूसरे दिन फिल्म अभिनेता रज़ा मुराद ने कही। उन्होंने कहा कि डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी से जज़्बे को सलाम हैं, जिन्होंने लगातार अदब की खि़दमत की है। हमलोग तो जो अभिनय करते हैं, वह फिल्म के परदे और टीवी पर आ जाता है, मगर अदब का काम इस तरह से नहीं आ पाता। इसके बावजूद अदब का काम करना बहुत बड़ी बात है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि गुफ़्तगू का काम बहुत ही सराहनीय है, ऐसे ही साहित्य का काम होते रहना चाहिए। आज इस कार्यक्रम में आकर एक ऐसी शख़्सियत से मिलने का मौका मिला है, जिन्हें हम परदे पर देखते रहे हैं।
| न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी |
गुफ़्तगू के अध्यक्ष डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी ने कहा सामूहिक प्रयास से हमलोगों ने ‘प्रयागराज लिटरेरी फेस्टिवल’ का आयोजन किया है। इस शहर की साहित्य के रूप में एक ख़ास पहचान रही है, जिसका बार-बार उल्लेख किया जाना चाहिए।
पूर्व अपर महाधिवक्ता क़मरूल हसन सिद्दीकी, अनिल कुमार ‘अन्नू भइया’, पंकज जायसवाल, डॉ. राकेश तूफ़ान, इश्क़ सुल्तानपुरी आदि ने भी लोगों को संबोधित किया। इस मौके पर गुफ़्तगू पत्रिका के नये अंक, डॉ. प्रमिला वर्मा की पुस्तक ‘पत्थर बोल उठे’, डॉ. शबाना रफ़ीक़ की पुस्तक ‘कोरोना तेरे काल में’ और मंजू लता नागेश की पुस्तक ‘यादों का कारवां’ का विमोचन किया गया।कार्यक्रम का संचालन मनमोहन सिंह तन्हा और धन्यवाद ज्ञापित किया।
इससे पहले सुबह के सत्र में ‘लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार सुनील शुक्ल और संचालन वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र ने किया। अजय राय, रविकांत, शिवाशंकर पांडेय, डॉ. एस.एम. अब्बास और डॉ. तारिक़ महमूद ने विचार व्यक्त किए। दोपहर के सत्र में कवि सम्मेलन-मुशायरे का आयोजन किया गया था।
इस मौके प्रभाशंकर शर्मा, अफ़सर जमाल, अनिल मानव, नीना मोहन श्रीवास्तव, शिवाजी यादव, हकीम रेशादुल इस्लाम, अर्चना जायसवाल, मधुबाला गौतम, संजय सक्सेना, डॉ. वीरेंद्र कुमार तिवारी, सिद्धार्थ पांडेय, डॉ. शबाना रफ़ीक, डॉ. पूनम अग्रवाल, मंजुलता नागेश, डॉ. सोमनाथ शुक्ल आदि मौजूद रहे।
इन्हें मिला अवार्ड
अकबर इलाहाबादी अवार्ड- शबीना अदीब
अदब नवाज अवार्ड - न्यायमूर्ति अशोक कुमार, आसिफ़ उस्मानी
डॉ. प्रीतम दास अवार्ड
डॉ. संदीप कुमार (लखनऊ), डॉ. प्रकाश खेतान (प्रयागराज)
कुलदीप नैयर अवार्ड-
रामदत्त त्रिपाठी
रविकांत
पंकज श्रीवास्तव
अक्षय चौहान ‘अक्स’
कैलाश गौतम अवार्ड -
विश्वास दुबे (नीदरलैंड)
जितेंद्र कुमार गंगवार (लखनऊ)
डॉ. प्रदीप मिश्र (सतना)
कुंवर नाजुक (चन्दौली)
सुभद्रा कुमारी चौहान अवार्ड-
सय्यदा तबस्सुम मंज़ूर (मंुबई)
डॉ. आरती कुमारी (मुजफ्फरपुर, बिहार)
डॉ. कुंकुम गुप्ता (भोपाल)
अर्पणा आर्या (प्रयागराज)
सीमा अपराजिता अवार्ड -
मधूलिका श्रीवास्तव (भोपाल)
नाज़ पुरवाई (अमरावती)
प्रियंका माथुर (नई दिल्ली)
शालू सुधीर अवस्थी (भोपाल)
पुष्पिता अवस्थी अवार्ड -
साँवत राम बैरवा (अजमेर)
निरुपमा खरे (भोपाल)
कमलचंद्रा (भोपाल)
पूजा गुप्ता (मिर्ज़ापुर)
धीरज अवार्ड -
ज़किया शेख़ मोहम्मद अमीन (मुंबई)
शकुंतला मित्तल (गुरुग्राम, हरियाणा)
सत्यम भारती (बेगुसराय)
सुधा श्रीवास्तव (प्रयागराज)
डॉ. सुधाकर पांडेय अवार्ड -
जनार्दन ज्वाला (मरणोपरांत, ग़ाज़ीपुर),
मोहन राकेश (दिलदारनगर),
डॉ. अब्दुल मन्नान (नई दिल्ली),
डॉ. वसीम रज़ा अंसारी (ग़ाज़ीपुर)
उमेश नारायण शर्मा अवार्ड -
वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार यादव
वरिष्ठ अधिवक्ता इमरान उल्लाह
अधिवक्ता राहुल चौधरी
अधिवक्ता अनिल कुमार वाजपेयी
मिल्खा सिंह अवार्ड -
आर. पी. शुक्ल (वालीबाल)
बिप्लब घोस (फुटबाल)
गुफ़्तगू अवार्ड -
डॉ. कंचना सक्सेना (जयपुर)
जगदीश कुमार धुर्वे (इटारसी)
डॉ. शैलेष गुप्त वीर (फतेहरपुर)
रचना सक्सेना (प्रयागराज)
प्रयागराज से ही पूर्ण होता है देश का साहित्य: मेयर
कार्यक्रम के पहले दिन ‘हमारी सांस्कृति विरासत’ पर हुई संगोष्ठी
| ‘गुफ़्तगू के 24 साल’ नामक स्मारिका का विमोचन करते अतिथि और टीम गुफ़्तगू के सदस्य। |
प्रयागराज। हमारे शहर से ही पूरे भारतवर्ष का साहित्य संपूर्ण होता है, बिना प्रयागराज के साहित्य को शामिल किए बिना देश का साहित्य कभी मुकम्मल नहीं हो सकता। निराला, फ़िराक़ महादेवी, अकबर, पंत तो यहां की धरोहर हैं ही, इसके साथ-साथ महत्वपूर्ण यह है कि महर्षि बाल्मीकि ने भी रामचरित मानस की रचना इसी धरती से की थी। इसी परंपरा और ऐतिहास को रेखांकित करने के लिए साहित्यिक संस्था ‘गुफ़्तगू’ ने ‘प्रयागराज लिटरेरी फेस्टिवल’ का आयोजन किया है। इस प्रयास की जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम है। गुफ़्तगू परिवार ने साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया है। यह बात 28 मार्च की शाम आर्य कन्या इंटर कॉलेज में साहित्यिक संस्था गुफ़्तगू की तरफ़ आयोजित ‘प्रयागराज लिटरेरी फेस्टिवल’ के पहले दिन ‘हमारी सांस्कृति विरासत’ विषय पर मेयर गणेश केसरवानी ने कही। उन्होंने कहा कि शहर की परंपरा और बेहतर ढंग से उल्लेखित करने के लिए नगर निगम की तरफ से ‘साहित्य तीर्थ’ की स्थापना की जा रही है। इस मौके पर पुस्तक ‘गुफ़्तगू के 24 वर्ष’ और ‘ए जनरी ऑफ अचिवमेंट एण्ड एस्पाइरेशन’ का विमोचन किया गया।
गुफ़्तगू के अध्यक्ष डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी ने कहा कि हमने प्रयागराज की परंपरा को एक बार फिर से पूरी दुनिया में उल्लेखित करने के लिए ही ‘प्रयागराज लिटरेरी फेस्टिवल’ का आयोजन किया है।
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में मीडिया स्टडी सेंटर के कोआर्डिनेटर डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कहा कि इस शहर का तहज़ीब कण-कण में बसा हुआ है। इस शहर को पत्रकारों, साहित्यकारों, ऋषियों-मुनियों, मौलवियों, चित्रकारों आदि ने मिलकर रचाया और बसाया है। इस शहर की ख़ासियत यहां की अक्कड़ी, फक्कड़ी और मक्कड़ी है, जो देश के किसी भी दूसरे शहर में नहीं मिलती।
मुख्य अतिथि पूर्व पुलिस महानिरीक्षक लालजी शुक्ल ने कहा कि संस्कार को मूल में रखकर ही सांस्कृतिक विरासत तैयार होती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र ने कहा कि अन्य चीज़ों के अलावा यहां की दही-जलेबी भी बहुत मशहूर है, जो कहीं और नहीं मिलती। अनिल कुमार ‘अन्नू’ भइया ने कहा कि गुफ़्तगू के प्रयास की जितनी भी सराहना की जाए कम है। डॉ. कंचन सक्सेना और अजीत शर्मा आकाश ने भी लोगों को संबोधित किया। संचालन मनमोहन सिंह ‘तन्हा’ और धन्यवाद ज्ञापन नरेश कुमार महरानी ने किया।
