गुरुवार, 21 मई 2026

 

बेला, चंपा, गुलाब सब थे मगर/ तुम जो आए तो तीरगी महकी’

‘स्मार्ट सिटी कार्निवाल’ में कवि सम्मेलन और मुशायरा

अपना कलाम पेश करते डॉ. नायाब बलियावी

प्रयागराज। ‘स्मार्ट सिटी कार्निवाल-2026’ के अंतर्गत साहित्यिक संस्था ‘गुफ़्तगू’ की तरफ से 06 मई को सिविल लाइंस मेें कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया गया। अध्यक्षता डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी और संचालन मनमोहन सिंह ‘तन्हा’ ने किया।

मशहूर शायर डॉ. नायाब बलियावी ने अपनी शायरी में संगम का शानदार उल्लेख किया-‘कली के शहर को शबनम का शहर कहते हैं/इलाहाबाद को संगम का शहर कहते हैं।’

गुफ़्तगू के सचिव नरेश कुमार महरानी ने ज़िन्दगी की हक़ीक़त को दर्शाया-‘न बदला है न बदलेगा, देख ज़माना रूप/कभी न फैलाऊं मैं पंख, पाकर ऊर्जा धूप।’ कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी की ग़ज़ल में प्रेमिका उल्लेख इस तरह था-‘बेला, चंपा, गुलाब सब थे मगर/तुम जो आए तो तीरगी महकी।’ मख़दूम फूलपुरी ने तरन्नुम से महफ़िल में उत्साह उत्पन्न कर दिया-‘सितमगरों में कभी अपना नाम मत करना/गिरो निगाह से सबकी वो काम मत करना।

कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद- (बाएं से) नरेश कुमार महरानी, डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी, प्रयागराज के मेयर गणेश केसरवानी, राजेश गुप्ता और विधायक पूजा पाल

युवा शायर अनिल मानव की शायरी ने अलग छाप छोड़ी-‘ कहते हैं जिसको इबादत की बात है/सज़दा न आरती वो मोहब्बत की बात है’। शैलेंद्र जय की कविता काफी उल्लेखनीय रही-‘ज़िन्दगी का वही तो राज़ रखता है/जीने का अपना जो अंदाज़ रखता है।’

वरिष्ठ कवयित्री नीना मोहन श्रीवास्तव ने अपनी शायरी ने मोहब्बत का जिक्र किया-‘वो मोढ़ ढूढ लाएं फिर मिलते थे हम कभी/हर शै महकता हुआ हम भी थे अजनबी।’ रचना सक्सेना ने अपनी ग़ज़ल से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा-चोट पर यूं सितम ढा रही हैं सिसकियां/ज़ख़्म दिल के भरे जा रही हैं सिसकियां’। अना इलाहाबादी ने कहा-‘एक जैसी परविश दे, एक से अवसर/बेटियां होती नहीं, बेटों से कमतर।’इनके अलावा डॉ. प्रीता वाजपेयी, सुनील दानिश, मधु गौतम, शिबली सना, डॉ. वीरेंद्र कुमार तिवारी, हरिनाथ शर्मा ‘सनसनी’, शाहीन खूश्बू आदि ने कलाम पेश किए। गौतम मुखर्जी और मोहम्मद आरिफ़ ख़ान ने संयुक्त रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया। 


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