गुफ़्तगू के अक्तूबर-दिसंबर 2025 अंक में
07. संपादकीय : बाबा-ए-अदब और युग कवि
8-11. मीडिया हाउस: 01 अक्तूबर 1950 से शुरू हुआ साप्ताहिक हिन्दुस्तान - डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी
12-13. उर्दू नाटक: हे ग़ज़ाला, हे ग़ज़ाला - असग़र वजाहत
14-16.रूह के पुकार बने शकील बदायूंनी के गीत - डॉ. प्रमिला वर्मा
17-19. दास्तान-ए-अदीब: बच्चों के साथ खूब खेलते थे राही मासूम रज़ा - डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी
20-21. इंटरव्यू: प्रो. शबनम हमीद - उर्दू के लिए संजीदगी से काम करने की ज़रूरत
22-28. चौपाल: 30 लाख रुपये की रॉयल्टी को किस रूप में देखते हैं ?
29. उर्दू के मुस्तनद शायर फ़हीम जोगापुरी
30-37. ग़ज़लें: उदय प्रताप सिंह, क़ादिर हनफ़ी, बसंत कुमार शर्मा, अनुराग मिश्र ‘ग़ैर’, डॉ. इश्क़ सुल्तानपुरी, प्रेमचंद गुप्त, अरविंद असर, शिवचरण शर्मा ‘मुज़्तर’, डॉ. इम्तियाज़ समर, रामावतार सागर, अर्शी बस्तवी, प्रदीप बहराइची, मनजीत कौर मीत, यासीन अंसारी, नूरउद्दीन नूर, नितिन पांडेय
38. अमर राग के मुक्तक
39-44. कविताएं: यश मालवीय, अरविन्द सिंह, प्रियंका माथुर, अरुण आदित्य, अर्चना गुप्ता, कमल चंद्रा, डॉ. पूर्णिमा पांडेय, मंजुल शरण, केदारनाथ सविता, अरुणिमा बहादुर खरे, पूनम श्रीवास्तव
45-53. तब्सेरा: रार्बट गिल और अजंता की पारो, शाम तक लौटा नहीं, पतवारी तुम्हारी यादें, मैं कविता हूं, पहला वेतन, गहवर, शब्द रंग, मेरी कुंडलियां, प्रदीप बहराइची के सौ शेर
54-55. उर्दू अदब : गुल हाय अक़ीदत, जुस्तजू
56-57. ग़ाज़ीपुर के वीर-31: सबके चहेते थे उसियां के असलम नेता-सुहैल ख़ान
58-62. अदबी ख़बरें
63-92. परिशिष्ट-1: डॉ. शबाना रफ़ी़क
63. डॉ. शबाना रफ़ीक़ का परिचय
64-66. अनुभूति और लोकानुभूति को उकेरती कविताएं - अशोक श्रीवास्तव ‘कुमुद’
67. नारी मन को उधेड़ती कविताएं - शैलेंद्र जय
68. एक बहुआयामी व्यक्तित्व - नरेश कुमार महरानी
69-70. समाज की विसंगतियों, कुप्रथाओं पर प्रहार- निरुपमा खरे
71-92. डॉ. शबाना रफ़ीक़ की कविताएं
93-125.परिशिष्ट-2 परिशिष्ट-2: शगुफ्ता रहमान ‘सोना’
93-94शगुफ्ता रहमान ‘सोना’ का परिचय
95-97. मिलने से बिछुड़ने तक का फलसफ़ा - डॉ. इश्क़ सुल्तानपुरी
98. शब्दों में पिरोकर किया दुनिया के हवाले- मनमोहन सिंह ‘तन्हा’
99. जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास - प्रिया श्रीवास्तव ‘दिव्यम्’
100. क़लम से जादू बिखेरती शगुफ़्ता रहमान -शिवाजी यादव
101-125. शगुफ़्ता रहमान की कविताएं
126-148. परिशिष्ट-3: जगदीश कुमार धुर्वे
126.जगदीश कुमार धुर्वे का परिचय
127-129. कविताओं में वस्तुस्थित का शानदार अवलोकन- नीना मोहन श्रीवास्तव
130-131. भरपूर मनोरंजन करतीं जगदीश कुमार धुर्वे की कविताएं- शिवाशंकर पांडेय
132-133. बहुमुखी प्रतिभा के प्रचारक-जयचंद प्रजापति ‘जय’
134-135. काव्यधारा में समाज के अनेक विषय समाहित-कमलचंद्रा
136-148. जगदीश कुमार धुर्वे की कविताएं
(गुफ़्तगू: अक्तूबर-दिसंबर 2025)


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