बुधवार, 24 मार्च 2021

भोजपुरी के अमर गीतकार थे भोलानाथ गहमरी

                                         

 

भोलानाथ गहमरी

                                                                      - शहाब खान गोड़सरावी

      

 कवि सम्मेलनों के मंच पर भोजपुरी कविता को देश के दूर-दराज़़ तक के इलाकों में ले जाने श्रेय जिन कवियों को जाता है, उनमें एक प्रमुख नाम भोलानाथ गहमरी का है। मंच पर जब वे अपनी सुरीली आवाज़ में गीत पढ़ने लगते तो श्रोता झूम उठते। ख़ासकर 80 और 90 के दशक में मंच पर उनकी उपस्थिति मुख्य आकर्षण की वजह होती थी। हालांकि उन्होंने भोजपुरी फिल्मों के लिए भी कई गीत लिखे हैं, लेकिन उनकी मंच की प्रस्तुति सब पर भारी पड़ती है। भोलानाथ गहमरी का जन्म 17 दिसंबर 1923 को एशिया के सबसे बड़े गांव गहमर के भीखम राव पट्टी मुहल्ले में रामचंद्र लाल वर्मा जी के घर हुआ था। पिता कानूनगों व प्रथम श्रेणी के न्यायिक अधिकारी थे। इनकी माता भागमनी देवी घरेलू स्त्री थी। भोलानाथ ने कक्षा छह तक की पढ़ाई बर्मा में की थी। उसके बाद पहले गहमर और फिर ग़ाज़ीपुर से इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी की। फिर इलाहाबाद के बिजली विभाग के इलेक्ट्रिक सप्लाई यूनिट प्राइवेट लिमिटेड में नौकरी मिल गई। नौकरी के दौरान वे इलाहाबाद के ही हीवेट रोड रहते थे। इलाहाबाद के एक कवि सम्मेलन में गोपालदास नीरज ने उन्हें पहली बार भोजपुरी गीत पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनकी प्रस्तुति ने लोगों का दिल जीत लिया, यहीं से उनके कवि सम्मेलनों की यात्रा शुरू हुई थी। सेवानिवृत्ति के बाद ग़ाज़ीपुर शहर के आमघाट में पारसनाथ वकील के यहां किराए पर रहने लगे थे।

 भोलानाथ की शादी एक सम्पन्न परिवार विहार के इटाढ़ी समीप ग्राम इंदौर में शिव कुमारी से हुआ था। उनकी कुल छह संतान थी, जिनमें एक बेटी का निधन हो गया है। बेटी ज्योत्सना श्रीवास्तव वकील हैं। चार बेटे डाॅ. अरुण कुमार, पदम श्रीवास्तव, सुमंत श्रीवास्तव और हेमंत कुमार श्रीवास्तव हैं। भोलानाथ के पहला काव्य संग्रह 1959 में ‘मौलश्री’ नाम से छपा था। नाटक ‘लंबे हाथ’ 1967 में और ‘लोहे की दीवार’ 1972 में प्रकाशित हुआ। सन् 1969 में भोजपुरी के उनका पहला गीत-संग्रह ‘बयार पुरवइया’ प्रकाशित हुआ, जिसकी भूमिका आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लिखी थी। दूसरा भोजपुरी गीत-संग्रह ‘अंजुरी भर मोती’ 1980 में प्रकाशित हुई। इस किताब की भूमिका फ़िराक़ गोरखपुरी ने भोजपुरी में लिखा था। भोजपुरी में तीसरी पुस्तक ‘लोक रागिनी’ 1995 में छपी थी। उनके द्वारा भोजपुरी फिल्मों में लिखी गीत ‘सजना के अंगना’, ‘बबुआ हमार’, ‘बैरी भइल कंगना हमार’, ‘बहिना तोहरे खातिर’ काफी प्रचलित रहे। उत्तर प्रदेश सरकार के चलचित्र विभाग के फिल्म ‘विवेक’ और ‘सबेरा’ के गीत और संवाद भी उन्होंने लिखा। इसके लिए उन्हें भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी व उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल बी. सत्यनारायण रेड्डी ने पुरस्कृत किया था। 

उनके भोजपुरी गीत - ‘लोग रागिनी में रहि-रहि नाचे मन मोर हो’, ‘जिनिगिया से भोर भइले बलमू’ आदि बहुत मशहूर हैं। अपने कलम से भोजपुरी को जो उन्होंने जो अनमोल योगदान दिया है, उसकी मिसाल नहीं। भोजपुरी के सुप्रसिद्ध लोक गायक मुहम्मद खलील, झनकार बलिया ने जिं़दगी भर भोलानाथ गहमरी के गीत गाए। भोलानाथ गहमरी आकाशवाणी में स्वर-परीक्षक और सलाहकार की भूमिका लंबे अरसे तक निभाते रहे। वो अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के पहला अधिवेशन 1975-77 में कला मंत्री, छठवा-सातवां 1981-83 में महामंत्री, बारहवा-तेरवाह 1993-95 में उपाध्यक्ष और चैदहवां में अध्यक्ष रहे। उनके नेतृत्व में पंद्रहवा अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन गाजीपुर में हुआ। 

गौरतलब हो कि भोजपुरी अखिल साहित्य से कई बरस पहले गहमरी जी के नेतृत्व में गहमर में भोजपुरी अधिवेशन हुआ था। साथ ही अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन विलासपुर में आयोजित आठवां अधिवेशन में उनके द्वारा लिखा भोजपुरी चित्रण नाटक का निर्देशन काफी प्रचलित हुआ था। भोजपुरी के दीर्घकालीन विशिष्ट सेवा के लिए उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से उन्हें राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार और भोजपुरी अकादमी पटना द्वारा उनकी गीत संग्रह ‘अजुरी भर मोती’ पर विशिष्ट भोजपुरी पुरस्कार विहार एवं हिंदी साहित्य सम्मेलन-प्रयाग द्वारा मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था। सन 2019 में भोलानाथ स्मृति में गाजीपुर जुलेलाल-लालदरवाजा स्थित मार्ग का नाम उनके नाम पर रखा गया है। भोलानाथ स्मृति में प्रत्येक वर्ष हरि नारायण हरीश के नेतृत्व में भोलानाथ गहमरी कवि सम्मेलन का विशेष आयोजन भी किया जाता है। भोलानाथ गहमरी को आंत में कैंसर हो गया था, जिसकी वजह से 8 दिसंबर 2000 ई० को गाजीपुर में उनका देहावसान हो गया।

(गुफ़्तगू के जनवरी-मार्च 2021 अंक में प्रकाशित)

1 टिप्पणियाँ:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

महान साहित्यकार को नमन।

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