मंगलवार, 21 नवंबर 2017

गुफ्तगू ने साहित्य की बुलंदी बरकरार रखी है


शैलेंद्र जय परिशिष्ट का विमोचन और मुशायरा 
इलाहाबाद। विपरीत हालात में जहां बड़ी-बड़ी पत्रिकाएं बंद हो रही हैं। रचनाएं और रचनाकार ख़ासकर साहित्यिक रचनाकारों के सामने संकट कम नहीं है, ऐसे में इलाहाबाद सरीखे साहित्यिक नगरी में साहित्य की बुलंदी बरकारार रखना उम्मीद जगाता है। गुफ्तगू पत्रिका ने यह काम कर दिखाया है। यह बात मुख्य अतिथि वरिष्ट रेलवे अधिकारी शैलेंद्र कपिल ने ‘गुफ्तगू’ के शैलेंद्र जय परिशिष्ट विमोचन के अवसर पर 12 नवंबर को सिविल लाइंस स्थित बाल भारती स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने कहा कि शैलेंद्र की शायरी कई मायने में बेहद ख़ास है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पं. बुद्धिसेन शर्मा ने कहा कि आज के दौर में जब धर्मयुग और साप्ताहिक हिन्दुस्तान जैसी पत्रिकाएं बंद हो गईं हैं, ऐसे माहौल में ‘गुफ्तगू’ के लगातार 14 साल से प्रकाशित होते रहना बड़ी कामयाबी है। इलाहाबाद जैसे शहर से ही ऐसी पत्रिका निकल सकती है। रविनंदन सिंह ने कहा कि शैलेंद्र जय की कविता अपनी अलग पहचान रखती हैं, नए बिंब और नए प्रतीक इनकी कविताओं में मिलते हैं।‘गुफ्तगू’ ने ऐसे कवि को परिशिष्ट निकालकर एक बड़ा काम किया है। इस अंक में प्रो. नामवर सिंह का इंटरव्यू और डाॅ. बशीर बद्र का सौ शेर इसको बेहद स्तरीय बना रहा है। नंदल हितैषी ने कहा कि इलाहाबाद से ऐसी पत्रिका का प्रकाशन बेहद खास है, इस तरह की स्तरीय पत्रिका निकालना बड़ी है। कार्यक्रम का संचालन इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी ने किया।
 दूसरे दौर में मुशायरे का आयोजन किया गया। अख़्तर अज़ीज़, सागर होशियारपुरी, जमादार धीरज, मोईन उस्मानी, शिवपूजन सिंह, नरेश महरानी, अनिल मानव, प्रभाशंकर शर्मा, भोलानाथ कुशवाहा, कृष्ण चंद्र श्रीवास्तव, लोकेश श्रीवास्तव, वंदना शुक्ला, मोइन उस्मानी, वाक़िफ़ अंसारी, डाॅ. नईम साहिल, अर्पणा सिंह, माहिर मजाल, योगेंद्र मिश्र, वंदना शुक्ला, रमोला रूथ लाल, विवेक सत्यांशु, डाॅ. वीरेंद्र तिवारी, अजय कुमार पांडेय, अरविंद वर्मा, सुनील दानिश, अजीत शर्मा आकाश, अरुण कुमार श्रीवास्तव और अदिति मिश्रा ने काव्य पाठ किया।


1 टिप्पणियाँ:

'एकलव्य' ने कहा…

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