शनिवार, 21 अप्रैल 2012

रोज़ एक शायर में आज - फ़रमूद इलाहाबादी


होगी बड़ी इनायत छोटा सा काम कर दो।
ये हुस्न, ये जवानी बस मेरे नाम कर दो।
आज इसने हक़ जताया, कल वो करेगा दावा,
हो जाओ अब मेरे तुम किस्सा तमाम कर दो।
क्या जाने इन अदाओं में कौन सा है जादू,
दिल मोम हो कि पत्थर सब को गुलाम कर दो।
अच्छा हुआ तुम्हारा चेहरा नक़ाब में हैं,
बेपर्दा तुम जो निकलो तो क़त्लेआम कर दो।
जुल्फ़ें हटाई चेहरे से तो सहर हुई है,
जुल्फ़ों को फिर गिराकर रंगीन शाम कर दो।
साक़ी की क्या ज़रूरत मयख़ाने कौन जाए,
पानी गिलास में है, नज़रों से जाम कर दो।
‘फ़रमूद’ हुस्न वालों की दिल्लगी है ऐसी,
जीने की चाह भरकर जीना हराम कर दो।
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तुम्हें बतलाएं क्या किन लोगों से खा बैठे हम धोखा।
यही समझो कि ग़ैरों ने दिया अपनों से कम धोखा।
किसी की जान ले लेना, किसी का घर जला देना,
है मेरी राय में इनसे बड़ा जुल्मो सितम धोखा।
कमीनों पर भरोसा करना ख़तरे से नहीं खाली,
इनायत में हैं इनकी साजि़शें रहमो-करम धोखा।
बहुत समझाया मैंने तुमको लेकिन बाज़ क्या आए,
तुम्हारी सोच है गंदी तुम्हारा हर कदम धोखा।
तुम्हें जब आजमाया तो हक़ीक़त सामने आयी,
ज़रा सी भी वफ़ादारी नहीं थी, एक दम धोखा।
तुम्हारे वास्ते फ़रमूद ने हस्ती मिटा डाली,
मगर बदले में उसको दे दिया तुमने सनम धोखा।
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इस जि़न्दगी को जी का जंजाल करने वाले।
न जाने कब मरेंगे मिस काल करने वाले।
औरों का माल चक्खे, अपना बचा के रक्खे,
कंजूसियों से खुद को खुशहाल करने वाले।
बेशर्म बेहया हैं सुधरेंगे न कभी ये,
धोती को फाड़ करके रूमाल करने वाले।
मैं ‘काल बैक’ करके सिर अपना पीटता हूं,
जब हाल पूछते हैं बदहाल करने वाले।
‘टापअप’ करा-करा के दीवालिया हुआ मैं,
तेरा बुरा हो मुझको कंगाल करने वाले।
डिब्बे में सिक्का डाला गाली सुना के चंपत
पकड़ेंगे किसको जांच और पड़ताल करने वाले।
‘फ़रमूद’ बच के रहना चालाक हैं बहुत ये,
बिन-तोड़ अपनी गोटों को लाल करने वाले।
मोबाइल नंबरः 9415966497

1 टिप्पणियाँ:

expression ने कहा…

बहुत खूब....................

अनु

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