सोमवार, 8 जून 2026

‘देश को आज़ाद कराने में अख़बारों की मुख्य भूमिका’

‘हिन्दी पत्रकारिता के 200 साल’ पर बोले न्यायमूर्ति अशोक कुमार

सम्मान प्राप्त करने के बाद का ग्रुप फोटो

प्रयागराज। 21वीं सदी की पीढ़ी अख़बारों से दूर हो रही है। हमारे समय में सामान्य ज्ञान बेहतर करने के लिए अख़बार पढ़ना ज़रूरी हुआ करता था। आज अख़बार और मीडिया भी बिल्कुल बदल गया है। आज का मीडिया पीजा और बर्गर की तरह हो गया है, अजीब-अजीब की तरह ख़बरें ख़ास तौर सोशल मीडिया पर देखने को मिलती हैं। शायद इस वजह से भी लोग मीडिया से दूर हो रहे हैं। 1947 से पहले देश को आज़ादी दिलाने में अख़बारों का मुख्य योगदान रहा है। यह बात राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने कही। कार्यक्रम का आयोजन 07 जून को प्रयागराज के बाल भारती स्कूल में किया गया।

गुफ़्तगू के जून-2026 अंक का हुआ विमोचन

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में मीडिया स्टडी सेंटर के कोआर्डिनेटर डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कहा कि इलाहाबाद ही ऐसा शहर है, जिसने महात्मा गांधी तक को पत्रकार बना दिया। ट्रेन छूट जाने पर महात्मा गांधी इलाहाबाद स्थित पॉयनियर अख़बार के दफ्तर पहुंचे थे, संपादक से इंटरव्यू छापने का कहा। संपादक ने उन्हें लिखकर दे जाने को बोला। गांधी जी तब 17 पेज का लेख वहीं बैठकर लिखा। लेख देने पर अख़बार ने नहीं छपा। बाद में वही लेख महात्मा गांधी की किताब ‘ग्रीन बुक’ के नाम से छपी। उन्होंने कहा कि कोलकाता से ‘उदन्ड मार्त्तण्ड’ अख़बार शुरू करने वाले पं. जुगल किशोर शुक्ल हमारे उत्तर प्रदेश के कानपुर के ही रहने वाले थे।

वरिष्ठ पत्रकार लईक़ रिज़वी ने कहा कि देश का पहला उर्दू अख़बार इलाहाबाद से ही मुंशी सदासुख लाल ने ‘बुद्धि प्रकाश’ से निकाली थी। इलाहाबाद का पत्रकारिता से बहुत ख़ास रिश्ता रहा है।

जुगल किशोर शुक्ल सम्मान प्राप्त करते बलराम दीक्षित

डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी ने कहा कि इलाहाबाद साहित्य और पत्रकारिता का मुख्य केंद्र रहा है। यहां के तमाम पत्रकार आज देश की प्रमुख मीडिया में बड़े पदोें पर हैं। ऐसे में ‘हिन्दी पत्रकारिता के 200 साल’ पर कार्यक्रम होना बेहद ज़रूरी था।

जुगल किशोर शुक्ल सम्मान प्राप्त करते मोहम्मद ताहिर

नई दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार रविकांत ने कहा कि पहले के संपादक विज्ञापन का दबाव बर्दाश्त नहीं करते थे, देश की आज़ादी और भलाई के लिए जी-जान से काम करते थे। वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता का स्वरूप एकदम से बदल गया है। विज्ञापन को ध्यान में रखकर अगर संपादक काम नहीं करेगा तो अख़बार कैसे छपेगा। अख़बार चलाने का खैरात देना समझना गलत है। अपने हितों की रक्षा तो करनी पड़ेगी। 

जुगल किशोर शुक्ल सम्मान प्राप्त करते संजय मिश्र

इस दौरान पांच लोगों को ‘जुगल किशोर शुक्ल सम्मान’ प्रदान किया गया साथ ही ‘गुफ़्तगू’ के नये अंक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन मनमोहन सिंह ‘तन्हा’ ने और धन्यवाद ज्ञापन गुफ़्तगू के सचिव नरेश महरानी ने किया। दूसरे दौर में कवि सम्मेलन और मुशायरा का आयोजन किया गया।

जुगल किशोर शुक्ल सम्मान प्राप्त करते अनिल सिद्धार्थ


 डॉ. वीरेंद्र कुमार तिवारी, नीना मोहन श्रीवास्तव, धीरेंद्र सिंह नागा, शिवाजी यादव, अफ़सर जमाल, हकीम रेशादुल इस्लाम, डॉ. सोमनाथ शुक्ल, आसिफ़ उस्मानी, डॉ. एस.एम. अब्बास, मंजुलता नागेश, अर्चना जायसवाल ‘सरताज’, रचना सक्सेना, संजय सक्सेना, सुनील दानिश, प्रभाशंकर ‘प्रयागी’, केशव सक्सेना, शिबली सना, शाहीद खूश्बू आदि ने कलाम पेश किया।

जुगल किशोर शुक्ल सम्मान प्राप्त करते योगेंद्र कुमार मिश्र




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