शनिवार, 12 मार्च 2016

सम्मान एहसान से नहीं एहसास से: प्रो. वर्मा

महिला दिवस पर सम्मानित हुईं 11 महिला साहित्यकार
इलाहाबाद। महिलाओं का सम्मान एहसान से नहीं बल्कि एहसास से होगा, इसलिए महिलाओं को सम्मानित करने के साथ उनको सही मायने में बराबरी का दर्जा देने के लिए काम होना चाहिए। ‘गुफ्तगू’ ने इस दिशा में काम शुरू जरूर किया है लेकिन अभी इसे और आगे ले जाने की जरूरत है। यह बात कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. लाल बहादुर वर्मा ने 08 मार्च को इलाहाबाद  विश्वविद्यालय के निराला सभागार में आयोजित ‘गुफ्तगू’ के कार्यक्रम में कही। इस अवसर ‘गुफ्तगू’ के महिला विशेषांक का विमोचन किया गया साथ ही देशभर 11 महिलाओं को ‘सुभद्रा कुमारी चौहान सम्मान ’से नवाजा गया। प्रो. वर्मा ने कहा आज पुरूष समाज महिलाओं को सिर्फ सम्मानित करने की बात दिखावे के रूप में ही करता है, मगर वास्तविक रूप से महिलाओं को वह स्थान नहीं देता जो उनका अधिकार है। इन महिलाओं का वास्तव में सम्मान तब होगा जब उनके घर में भी उसी तरह उन्हें सम्मान हासिल हो। कार्यक्रम का संचालन इम्तियाज़ अहमद गाजी ने किया।
मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व सचिव सुधाकर अदीब ने कहा कि पिछले 12 साल से गुफ्तगू ने पत्रिका का प्रकाशन और संचालन करके बड़ा काम किया है। इस तरह के प्रयास की कद्र की जानी चाहिए। नगर प्रमुख अभिलाषा गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को सम्मान और अधिकार आरक्षण से नहीं बल्कि उनके काम से होना चाहिए। उनका आदर उनके काम और उनकी काबलियत के आधार पर की जानी चाहिए। सही मायने में वही उनका सम्मान है। मेयर ने कहा कि ‘गुफ्तगू’ अपने काम के बल पर जानी जाने लगी है , अब यह किसी परिचय की मोहताज़ नहीं है। वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र ने कहा कि ‘गुफ्तगू’ अब एक कामयाब पत्रिका के रूप में सामने आई है, ‘महिला विशेषांक’ निकलाकर और महिलाओं केा सम्मानित करके बड़ा काम किया है। भोपाल से आए कवि अरुण अर्णव खरे ने कहा कि ‘गुफ्तगू’ का यह प्रयास बहुत शानदार है, ऐसे कार्य आगे भी जारी रहने चाहिए। यश मालवीय इस असवर पर महिलाओं पर गीत प्रस्तुत किया। सीएमपी डिग्री कालेज के छात्रसंघ अध्यक्ष वीर सिंह ने कहा कि ‘गुफ्तगू’ का यह कार्य बहुत ही सराहनीय है, हमें इसकी सराहना करने के साथ ही इनके काम में सहयोग प्रदान करना चाहिए। दूसरे दौर में महिलाअ कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया है, जिसका संचालन शैलेंद्र जय ने किया। डॉ. तारा गुप्ता, देवयानी, मीरा सिन्हा, शादमा ज़ैदी शाद, संजू शब्दिता, शिबली सना, तलत परवीन, वजीहा खुर्शीद, सरस दरबारी, संगीता भाटिया, शाहीन खुश्बू, शबीहा खातून, डॉ. अनुराधा चंदेल ‘ओस’, स्नेहा पांडेय, अर्चना पांडेय, मधु सिंह, प्रज्ञा सिंह परिहार आदि ने काव्य पाठ किया। इस मौके पर रविनंदन सिंह, शिवपूजन सिंह, प्रभाशंकर शर्मा, लोकेश श्रीवास्तव, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, संजय सागर, डॉ. विक्रम, रोहित त्रिपाठी रागेश्वर, अनुराग अनुभव, नरेश कुमार महरानी,  डॉ. विनय श्रीवास्तव, शैलेंद्र जय, मनमोहन सिंह तन्हा, फरमूद इलाहाबादी, तलब जौनपुरी, राजकुमार चोपड़ा, भोलानाथ कुशवाहा, केदारनाथ सविता आदि मौजूद रहे। 
इन्हें मिला ‘सुभद्रा कुमारी चौहान सम्मान’
इलाहाबाद। चित्रा देसाई मुंबई, अर्चना पांडेय मुंबई, डॉ. तारा गुप्ता गाजियाबाद, निवेदिता श्रीवास्तव टाटा नगर, तलत परवीन पटना, सुधा आदेश लखनउ, तनु श्रीवास्तव गोंडा, अनुराधा चंदेल ‘ओस’ मिर्जापुर, स्नेहा पांडेय बस्ती, शबीहा खातून बस्ती, रुचि श्रीवास्तव 
कार्यक्रम का संचालन करते इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी
महिला विशेषांक का विमोचन: मुनेश्वर मिश्र, प्रो. लाल बहादुर वर्मा, मेयर अभिलाषा गुप्ता, सुधाकर अदीब, यश मालवीय, वीर सिंह और अरुण अर्णव खरे
सम्मानित हुई महिला साहित्यकारों का गु्रप फोटो: बायें से- अर्चना पांडेय, चित्रा देसाई, अनुराधा चंदेल ‘ओस’, सुधा आदेश, अभिलाषा गुप्ता, डॉ. तारा गुप्ता, स्नेहा पांडेय, शबीहा खातून, और तलत परवीन
कार्यक्रम के दौरान ‘गुफ्तगू’ के संस्थापक इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी को उनके जन्मदिन पर सम्मानित करतीं मेयर अभिलाषा गुप्ता, साथ में खड़े हैं शिवपूजन सिंह
विचार व्यक्त करते प्रो. लाल बहादुर वर्मा
विचार व्यक्त करते सुधाकर अदीब
विचार व्यक्त करतीं अभिलाषा गुप्ता
विचार व्यक्त करते अरुण अर्णव खरे
विचार व्यक्त करते मुनेश्वर मिश्र
विचार व्यक्त करते वीर सिंह
काव्य पाठ करते यश मालवीय
कार्यक्रम के दौरान सभागार में मौजूद लोग

चित्रा देसाई का सम्मान करते प्रो. लाल बहादुर वर्मा

अर्चना पांडेय का सम्मान करतीं अभिलाषा गुप्ता

अनुराधा चंदेल ‘ओस’ का सम्मान करती अभिलाषा गुप्ता

शबीहा खातून का सम्मान करती अभिलाषा गुप्ता

सुधा आदेश का सम्मान karte प्रो. लाल बहादुर वर्मा

डॉ. तारा गुप्ता का सम्मान करती अभिलाषा गुप्ता

तलत परवीन का सम्मान करती अभिलाष गुप्ता

स्नेहा पांडेय का सम्मान करती अभिलाषा गुप्ता

रुचि श्रीवास्तव का सम्मान करती अभिलाषा गुप्ता

2 टिप्पणियाँ:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (13-03-2016) को "लोग मासूम कलियाँ मसलने लगे" (चर्चा अंक-2280) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Shanti Garg ने कहा…

सार्थक व प्रशंसनीय रचना...
मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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