रविवार, 13 सितंबर 2015

परवीन शाकिर की तरह प्रेम का बेबाक उल्लेख

                              स्नेहा पांडेय की पुस्तक ‘सिर्फ़ तेरे लिए’ का विमोचन और मुशायरा

इलाहाबाद । काव्य संग्रह ‘सिर्फ़ तेरे लिए’ के शुरू में ही शामिल कविता ‘प्रेमांकुर’ को पढ़ने के बाद ही इस पूरी किताब को पढ़े जाने की इच्छा जागृति होती है, यही वजह है कि मैं यह पूरी किताब पढ़ गया हूं। स्नेहा पांडेय ने अपनी कविताओं के माध्यम से प्रेम का बहुत सटीक तरीके से उल्लेख किया है। आज जब प्रेम मात्र दिखावे और टीवी शो का विषय बन गया है, ऐसे में प्रेम का सही रूप में उल्लेख करके स्नेहा ने बहुत बड़ा काम किया है। यह बात मुरादाबाद के जाने-माने गीतकार माहेश्वर तिवारी ने 16 अगस्त की शाम साहित्यिक संस्था ‘गुफ्तगू’ के तत्वावधान में स्नेहा पांडेय की पुस्तक ‘सिर्फ तेरे लिए’ के विमोचन अवसर पर कही। हिन्दुस्तानी एकेडेमी के सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर एम.ए. क़दीर ने की, मुख्य अतिथि माहेश्वर तिवारी थे। संचालन इम्तियाज अहमद गाजी ने किया।
माहेश्वर तिवारी ने आगे कहा कि स्नेहा पांडेय ने अपनी कविताओं में विरासत को नहीं नकारा है, यह एक और पहलू है जो उनको एक सफल कवयित्री बना रहा है। यश मालवीय ने कहा कि स्नेहा ने अपनी कविता में बहुत सही ढंग से बखान किया है कि वाकई प्रेम निडर होता है। उन्होंने कहा यह बेहद सुखद पल है कि पुस्तक विमोचन के अवसर स्नेहा पांडेय की माता निर्मला देवी  पांडेय जी भी मौजूद हैं, यह सुखद अवसर बहुत कम लोगों को नसीब होता है। टीवी चैनल आलमी सहारा के डिप्टी एडीटर लईक़ रिज़वी ने स्नेहा पांडेय की कविताओं को पाकिस्तान की शायरा परवीन शाकिर की शायरी से जोड़ते हुए कहा कि स्नेहा की कविता में भी प्रेम का बहुत शानदार ढंग से प्रस्तुतिकरण किया है। यही वास्तविक कविता की ओर ले जाता है। स्नेहा एक कामयाब कवयित्री नजर आती हैं। हिन्दुस्तानी एकेडेमी के कोषाध्यक्ष रविनंदन सिंह ने कहा कि स्नेहा की कविताओं में अमृता प्रीतम की कविताओं की तरह का चित्रण दिखाई देता है। शैलेंद्र कपिल, अखिलेश सिंह, धर्मेंद्र श्रीवास्तव और एम.ए.क़दीर ने स्नेहा पांडेय की कविताओं की प्रशंसा की।
दूसरे दौर में मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसका संचालन  शैलेंद्र जय ने किया। शिवपूजन सिंह, प्रभाशंकर शर्मा, नरेश कुमार ‘महरानी’, रुचि श्रीवास्तव, संजय सागर, अनुराग अनुभव, रोहित त्रिपाठी रागेश्वर, लोकेश श्रीवास्तव, ललिता मिश्रा, पिंकी पांडेय, गौरव मिश्र, सुभाष चंद्र, फरमूद इलाहाबादी, अजीत शर्मा आकाश, डॉ. वीरेंद्र तिवारी, वाकिफ़ अंसारी, नईम साहिल, सागर होशियारपुरी, जमादार धीरज, शाहीन खुश्बू, पीयूष मिश्र, अशोक कुमार स्नेही, कविता उपाध्याय, अजामिल  व्यास, तलब जौनपुरी, विनय श्रीवास्तव, मनमोहन सिंह तन्हा, भारत भूषण जोशी, डॉ. इश्तियाक़ अहमद, कविता उपाध्याय, पूर्णिमा मालवीय आदि ने कलाम पेश किया ।  

                     माहेश्वर तिवारी
                      एम.. क़दीर
                         यश मालवीय
                       रविनंदन सिंह
                       शैलेंद्र कपिल
                     लईक़ रिज़वी
                      इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी
                    अखिलेश सिंह
  
                         स्नेहा पांडेय
                       रुचि श्रीवास्तव
          शिवपूजन सिंह
                        प्रभाशंकर शर्मा

1 टिप्पणियाँ:

Emmanuel ने कहा…

God bless you!
Immanuel
(Catholic blogwalking)

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