हाईकोर्ट के क़ाबिले-कद्र अधिवक्ता फ़रमान नक़वी
- डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी
मौजूदा समय में सय्यद फ़रमान अहमद नक़वी इलाहाबाद हाईकोर्ट के नामवर अधिवक्ताओं में से हैं। गरीब और असहाय लोगों के मुकदमों की पैरवी बिना फीस के करने के साथ ही परेशान हाल लोगों की मदद करने को लेकर भी ये काफी सक्रिय रहते हैं। इन्होंने कई ऐसे मुकदमों की पैरवी की है, जिसकी वजह से असहाय लोगों को काफी राहत मिली है। जय प्रकाश नारायण ने इमरजेंसी के समय जिस संस्था का गठन किया था, उसके प्रदेश अध्यक्ष से लेकर नेशनल एक्जीक्यूटिव में भी सय्यद नक़वी काम करते रहे हैं। इस समय बहुत चर्चित मामले ज्ञानवापी की भी पैरवी आप इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर रहे हैं। कई अन्य सामाजिक संगठनों से भी जुड़े हुए हैं।
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| सय्यद फ़रमान अहमद नक़वी |
सय्यद फ़रमान अहमद नक़वी का जन्म 15 जुलाई 1954 को कोलकाता में हुआ है। वालिद मरहूम जनाब सय्यद मोहम्मद अहमद नक़वी और वालिदा मोहतरमा मरहूमा हयातुन्निसा से इनको बहुत अच्छे संस्कार मिले हैं, जिसकी वजह से इनके अंदर समाज सेवा की भावना कूट-कूटकर भरी हुई है। किसी गरीब-असहाय की परेशानी की जानकारी मिलती है तो ये उसकी बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं। इनके वालिद सय्यद मोहम्मद नक़वी सरकारी नौकरी में थे, जिसकी वजह से सय्यद फ़रमान की अधिकतर शिक्षा उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में पूरी हुई। वर्ष 1969 में फतेहपुर से ही हाईस्कूल और वर्ष 1971 में आपने इंटरमीडिएट किया है। वर्ष 1973 में फतेहपुर के महात्मा गांधी डिग्री कॉलेज से आपने स्नातक किया है। वर्ष 1979 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एल.एल-बी. किए। इसके बाद फतेहपुर में जिला न्यायालय में वकालत का पंजीयन कराकर प्रैक्टिस शुरू कर दिए। वालिद और कुछ दूसरे लोगों की सलाह पर वर्ष 1982 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में पंजीयन कराकर यहीं पर वकालत शुरू कर दिए। प्रैक्टिस की शुरूआत इन्होंने खुद अपने ही दम पर की, किसी को अपना गुरु नहीं बनाया, लेकिन वरिष्ठ वकीलों की सलाह समय-समय पर लेते रहे।
वर्ष 1991 में इन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में सरकारी वकील के रूप में नियुक्त किया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इनकी क़ाबलियत को देखते हुए वर्ष 1995 तक इसी पद पर बनाए रखा। इसके साथ ही वर्ष 1991 से वर्ष 1999 तक भारत सरकार के अधिवक्ता के रूप में भी कार्यरत रहे। वर्ष 2019 में आप इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हो गए। फ़रमान नक़वी पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज के प्रदेश अध्यक्ष रहे चुके हैं। इस संस्था की स्थापना आपातकाल के दौरान जय प्रकाश नारायण ने की थी। जनाब नक़वी वर्तमान समय में इस संस्था के नेशनल कार्यकारिणी के सदस्य हैं।
सय्यद फ़रमान अहमद नक़वी ने कई महत्वपूर्ण मुकदमों की पैरवी की है, जो अपने आपमें बेहद ख़ास है। एक मामला पुलिस कस्टडी में एक दुकानदार की मौत का है। वर्ष 2004 में दरियाबाद के एक दुकानदार ने मेडिकल स्टोर के लिए बैंक से कर्ज़ लिया था। इस मामले में पुलिस उस दुकानदार को पकड़कर थाने ले गई। पुलिस कस्टडी में ही उस दुकानदार की मौत हो गई थी और दुकानदार के परिवार के पालन-पोषण का कोई साधन नहीं था। सय्यद नक़वी ने इस मामले का खुद ही संज्ञान लेकर हाईकोर्ट में मुकदमा दायर किया और दुकानदार के परिवार को मुआवजे के तौर पर 7.50 लाख रुपये दिलवाया। इसी तरह पुरामुफ्ती थाना के एक 24 वर्षीय लड़के को बमरौली रेलवे स्टेशन के पास से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, जिसकी जेल में ही मौत हो गई। सय्यद फ़रमान अहमद नक़वी ने इस लड़के का मुकदमा भी खुद लड़ा और परिवार वालों को हाईकोर्ट के जरिए 10 लाख रुपये का मुआवजा दिलाया। इसी तरह के कई अन्य मुकदमों की भी खुद ही पैरवी करके इन्होंने गरीब और असहाय लोगों को कोर्ट के जरिए न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।
(गुफ़्तगू के अक्तूबर-दिसंबर 2023 अंक में प्रकाशित)

