| लक्ष्मी अवस्थी |
- इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी
लक्ष्मी अवस्थी 73 वर्ष की उम्र में भी बहुत सक्रिय हैं, तमाम सामाजिक और साहित्यिक गतिविधियों में हिस्सा लेती हैं और समाज की बेहतरी के चिंतित रहती हैं। इनरव्हील लेडीज क्लब के माध्यम से आज भी गरीब बच्चों को पढ़ाती हैं और उनकी हर तरह से मदद करती हैं। जिन गरीब बच्चों में संगीत और गायन के प्रति रुचि है, उन्हें मुफ्त में इसकी शिक्षा देती हैं। आपदा में बढ़चढ़ कर लोगों की मदद करती हैं। इनका कहना है कि जब तक इस शरीर में जान है गरीबों की मदद करती रहेंगी। लक्ष्मी अवस्थी का जन्म 1942 में चौक, इलाहाबाद में हुआ। पिता कन्हैया लाल मिश्र एजी आफिस में सेक्शन अफसर थे, माता रामकली कक्षा आठ पास थीं और कुशल गृहणी थीं। पिता कक्षा आठ पास थे, लेकिन उर्दू अच्छी आती थी, उर्दू में कविताएं भी लिखते रहे, खा़सकर देशभक्ति गीतों के प्रति उनमें अधिक रूझान था। छह भाई और तीन बहनों में आप छठें नंबर पर हैं। आपने शुरूआती शिक्षा गौरी पाठशाला से हासिल की। कक्षा छह में थीं तभी प्रयाग संगीत समिति में दाखिला ले लिया। इंटरमीडिएट की शिक्षा प्रयाग महिला विद्यापीठ से हासिल की, तब वहां की प्रधानाचार्या महादेवी वर्मा थीं, तब इलाहाबाद का साहित्यिक परिदृश्य पूरे देश में शिखर पर था। प्रयाग संगीत समिति से ही डंास और कत्थक में एडमीशन डिग्री हासिल की। इसके बाद आपको सेंटल स्कूल में नौकरी मिल रही थी, लेकिन ज्वाइन नहीं किया, फिर 1982 में जवाहर बाल भवन में संगीत शिक्षिका के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद 1982 में म्युजिक इंस्पेक्टर के पद पर ज्वानिंग मिली और एशियाड में हिस्सा लिया। 15 फरवरी 1966 को क्लासिकल और 1967 में सगीत प्रभाकर किया, अखिल भारतीय कंपटीशन में आपने एवार्ड भी जीता। आपकी शादी 1965 में एयर फोर्स में पायलट रहे गोपाल कृष्ण अवस्थी से हुई, जिनसे तीन बच्चे हैं। गोपाल कृष्ण अवस्थी पंडित बाबू राम अवस्थी के पुत्र थे। पति को फोटोग्राफी का बड़ा शौक था, फोटोग्राफी के लिए इन्होंने अपने बाथरूम को डार्करूम के रूप में बदल दिया था। पति को फोटाग्राफी करते देखना इनको बहुत अच्छा लगता था, बताती हैं कि अच्छे कैमरे लिए इनके पति ने एक बार भूख हड़ताल भी की थी, जो मांग पूरी हो जाने पर ही खत्म हुई। पति का वर्ष 2003 में निधन हो गया।
लक्ष्मी अवस्थी ने 1965 में आल इंडिया रेडिया से पहला एडीशन दिया था। इसके बाद आकाशवाणी के मद्रास, श्रीनगर और इलाहाबाद आदि स्टेशनों से कार्यक्रम प्रस्तुत करती रही हैं। इनके तीन बच्चों में पुत्र जयंत अवस्थी टेनिस के खिलाड़ी हैं, इनका नाम लिम्बा बुक आफ रिकार्ड में भी दर्ज हो चुका है। बेटी जया अवस्थी भी लांग टेनिस की खिलाड़ी है, उसने प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में इलाहाबाद विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया है। देश की संपन्नता और तरक्की बात करने पर ये अपने पिता कन्हैया लाल मिश्र की महात्मा गांधी पर लिखी हुई कविता याद करते हुए सुनाती हैं- ‘हर बात अब तक याद है हमें/उस बाग के बूढ़े माली की/थी खोई हुई अंधियारी में/जागी हुई रातों-रातों की/कहने को तो दुबला-पतला था/ लड़ता था मगर जंजीरों से।’
(publish in guftgu march-2016)
